वैज्ञानिक नामः रेम्पहेस्टीडे
दक्षिण अमेरिका मूल के निवासी यह टोकेन्स सवाना के और इसके उष्णकटिबंधीय वनों और झाड़ियों में रहते हैं। टोकेन्स अपना घोंसला पेड़ों के पोले तनों में बनाते हैं। यह अपने द्वार बनाए गए छिद्रों में और कठफोडवा ¼वुडपिकर्स½ द्वारा छोडे गए घोंसलों को अपनी शरणस्थली बनाते हैं।
टोकेन्स पांच या छह पक्षियों के झुण्ड में विचरण करते हैं। टोकेन्स सर्वभक्षी होते हैं ¼पौधे और पशु दोनों½ हैं उनके भोजन का प्रमुख स्रोत फल होता है जिसे वे लेजाकर पेड़ों पर बने अपने घोंसलों में लेजाकर खाते हैं। इन्हें अण्डे] कीट] सरिसृप ¼रेप्टाइल½] छोटे पशु और नट्स का भी सेवन करते हैं।
टोकेन्स के पंख काफी छोटे होते है इस वजह से वे काफी दूरी का फासला आसानी से तय कर लेते हैं। यह टोकेन्स के लिए कोई समस्या नहीं होती क्यों कि इन्हें अधिक दूरी का सफर तय नहीं करना पड़ता है। वर्षवन के पेड़ों के आस-पास मंडराते हैं और इन्हें अपने भोजन के लिए अधिक दूरी तय नहीं करनी पड़ती।